असम का एक ऐसा मंदिर जहां छह महीने ही होती है पूजा-अर्चना
असम का एक मंदिर ऐसा जहां छह महीने ही होती है पूजा-अर्चना
दुनिया भर के मंदिरों में सुबह तड़के प्रार्थना शुरू हो जाती है और शाम की आरती नियमित रूप से होती है, जिसमें लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। एक मंदिर ऐसा भी है जहां साल में केवल छह महीने ही पूजा-अर्चना होती है। हम बत कर रहे हैं असम के काशी बिश्वनाथ मंदिर की।
दूसरे काशी के रूप में प्रसिद्ध बिश्वनाथ जिले के गुप्त काशी बिश्वनाथ घाट का एक ऐतिहासिक विशेष मंदिर है। इस मंदिर में सिर्फ छह महीने ही लोग पूजा-अर्चना करते हैं। यह देवालय छह महीने सूखा और छह महीने पानी के नीचे रहता है।
27 ऐतिहासिक मंदिरों में से एक
असम के इतिहास में 27 प्रसिद्ध मंदिरों में से यह भी एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर को बिश्वनाथ गोहाईं या पानी बिश्वनाथ के नाम से जाना जाता है। बरसात आरंभ होते ही यह मंदिर पूरी तरह ब्रह्मपुत्र के पानी में डूब जाता है। बाढ़ के जाने के बाद लोग इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। सूखे के समय अस्थायी रूप से मंदिर को बनाया जाता है।
इतिहासकारों की मानें तो 16वीं शताब्दी से लोग इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए आते आ रहे हैं। इस मंदिर के प्रति स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। इसकी वजह से छह महीने यहां पर श्रद्धालुओं की काफी चहल-पहल देखी जाती है। इन दिनों मंदिर में पूजा करने के लिए लोगों का पहुंचना जारी है। स्थानीय लोगों ने इस मंदिर के बेहतर प्रबंधन की मांग की है।

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